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भगवान्...मैं अब औनेष्ट्ली ही धन एकत्र करूंगा....सभा चाहे मुझे मिले अथवा निकल जाये हाथ से....’
१५ उधर दोनों भागे-भागे रेल्वे ष्टेशन पहुंचे....पर तबतक कितनी ही रेलगाडियां दोनों ही दिशाओं में निकल जा चुकी थीं.....अर्थात्....अर्थात् वह चोर गया हाथ से....अब क्या करें!!! इस्पेक्टर की कडी चेतावनी थी कि यदि वे उस चोर को पकडे विना लौटे तो उन्हें सस्पेण्ड कर दिया जायेगा...उन्हें आकाश घूमता दिख रहा था....कुछ समय वे सर थामे भूमि पर बैठे... तत्पश्चात् उठे और उन्हीं पदचिह्नों का अनुसरण करते प्रत्यागमन करने लगे....ऐसा बोले तो वे रिटर्न होने लगे....क्या जाने मार्ग में कोई उनका अभिज्ञान बताने वाला मिल जाये... पीछे लौटते-लौटते उन चिह्नों से मेल खाते एक युग्म जूते-चिह्न और मिले....समान आकार था...उनके पीछे चलते-चलते वे एक बस-ष्टैण्ड पहुंचे जहां एक साधारण-सा व्यक्ति हाथ में बैग लिये बस की प्रतीक्षा कर रहा था..... एक पुलिस्वाले ने द्वितीय की आंखों में देखा - "क्या बोलता तू ?"
"क्या मैं बोलूं ?...." दोनों ने ही आंखों ही आंखों में बातें कीं... "तो चलो.."
"हां चलो....."
"ए...."
"मुझे बस पकडनी है...."
"कहां जाने के चक्कर में है?"
"मुझे अपने पैतृक आवास जौनपुर जाना है...."
"अच्छा...माल जौनपुर ले जाकर रखेगा....!चल, माल यहां रख दे और फूट ले....हम कह देंगे अपराधी माल छोडकर भाग गया...."
"माल...! कैसा माल..?"
"अरे...यह शौप के अन्दर गया कब...? ये तो बाहर ही अभी ताले खोलने में लगा था..."
"हूं....तब तो इसे पकडना ही होगा...चोर....अन्ततः पकडा गया न तू......."
"चोर....कौन चोर ???????????"
"चुप्प स्साले.... गार्ड को अचेत कर ज्वेलरी शौप लूटने चला था!!!! अब चल थाने...." दोनों उसे पकड लेते हैं......
"छोड दे...तू लोग पुलिस्वाला है या कोई गुण्डा बदमाश है?????? चल हट...."
"अरे....तू हमें छाती दिखा रहा है?? तेरा ये दुःसाहस कि तू मुझसे आंखें दिखा बात करे....अरे...इसके विरुद्ध आरोप लिखो......इसने हमें गालियां दीं....पुलिस्वालों पर हाथ उठाया....पिस्तौल छीनने का प्रयास किया....और यह एक देशी पिस्तौल, जो कि हम कल एक भागते अपराधी के हाथ से गिर जाने पर उठा लिये थे, इसके पौकिट में डाल देते हैं कि साला इसके पौकिट से एक देशी पिस्तौल निकला.... "
वह चिल्लाना चाहता है पर वे दोनों उसका मुंह पकड लेते हैं और देख रहे हैं कि कोई आटो इधर आये... एक औटो आया तो उसमें उसे पकड बिठा चल देते हैं....थाने पहुंच उसे अन्दर बन्द कर देते हैं....वह कितना भी अपनी निर्दोषता बताये कोई उसकी सुनता नहीं....पुलिस अधिकारी समर के जूते के समान ही जूता उसे पहना देख दोनों पुलिस्वालों की पीठ थपथपाते हैं....वह व्यक्ति मोबाइल से परिवारवालों को बताता है....उस समय परिवार में केवल महिलायें थीं...वे दो-तीन और महिलाओं को संग ले आ उसे निर्दोष बता छोड देने का बार-बार आग्रह करती हैं....इसपर सभी पुलिस्वाले उनपर क्रुद्ध हो लाठी चार्ज का आदेश देते हैं....लाठियां चलने पर वे स्त्रियां वहां से भाग खडी होती हैं....एक प्रेस-रिपोर्टर इनका फोटो खींचता है...समाचारपत्र में प्रकाशित भी होता है....पर इन पुलिस्वालों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होती....
दृश्य - वह व्यक्ति थाने में अन्दर बन्द -"भाग्य फूटा मेरा...देखो मैं कहां आ गया......!"
वे दोनों पुलिस्वाले - ष्टाइल में - "भाग्य निखरा हमारा...देखो हमदोनों न्यूज में छा गया....!"
१६ समर अपनी फिल्म की शूटिंग के क्रम में व्यस्त है....तभी राज निर्माता से मिलने वहां आता है....राज सारी आपबीती निर्माता को सुना रहा है.....संयोग से कुछ बातें समर भी सुन जाता है..... वह राज से इस सम्बन्ध में बात करता है.....यह जानकर कि सभा उसी की म्यूजिक कम्पनी के लिये गाती है, समर राज में विशेष रुचि लेता है, क्योंकि सहायता के नाम पर उसे सभा से निकटता प्राप्त होने का सुनहरा अवसर दिख रहा है.....
"मिष्टर राज.....मुझे आपके ऊपर आ रहे संकटों के सम्बन्ध में कुछ जानकारी यहां बैठे सुनते मिली....रियलि आइ सिम्पैथाइज विथ यू....नौट ओन्लि सिमपैथि बट आइ विश टू हेल्प यू आल्सो....बताइये मैं आपकी किस प्रकार से सहायता कर सकता हूं...?"
"आप सारी बात समझ रहे हैं....आप स्वयम् विचार करें...."
"वैसे आपने मुझे अभिजाना?.....मैं आपसे कुछ दिनों पूर्व द्वीप पर मिला था....मेरे बोट की छींटें आपलोगों पर पडी थीं..."
"हं....मौडल!!!"
"पर अब मैं केवल मौडल नहीं हूं......इस फिल्म में छोटा-सा ही, पर अच्छा रोल मिला है...."
"नाइस...बी ग्रोइंग आल्वेज....."
"और यही कामना मेरी आपके लिये भी है....अभी मैं फ्री हूं....आपको यदि स्वीकार हो तो मैं चलुं आपकी कम्पनी आपके संग..."
"हां, अवश्य..." राज ने सोचा क्या जाने इससे कुछ अच्छी सहायता मिल ही जाये...पर वो क्या जाने समर सभा के चक्कर में जाने को उत्सुक था वहां....राज अपनी कार में उसे ले जाता है.....सभा आज वहां नहीं आयी है....तब भी समर अपनी पकड बनाने के लिये इधर-उधर घूमकर निरीक्षण करता रहा कि चोर कैसे आया होगा...क्या हथकण्डे अपनाये होंगे उसने...सभा के प्रेम में उसे सच में रुचि आने लगी इन बातों में....उसपर निज प्रभाव छाने के विशेष उद्देश्य से उसने सारी छानबीन आरम्भ की...कोई दुश्मन तो नहीं...कभी किसी के संग.....सभा जी के पीछे तो कोई नहीं पडा...इतनी अच्छी गायिका जो हैं....!"
"हां...सभा की नियुक्ति प्रथम सुनील म्यूजिक में हुई थी...पर मैंने रातों-रात उसे यहां राज म्यूजिक के लिये गाने को मना लिया जिसपर सुनील बहुत क्रुद्ध हुआ था....इस बात पर तो मैंने अभी पर्यन्त ध्यान नहीं दिया था....सुनील भी हमारा दुश्मन हो सकता है..."
"हूं....पर यह कन्फर्म तो करना होगा कि दुश्मन वही है इन सभी चोरियों के पीछे......”
"वो कैसे..?"
"मैं बताता हूं..."
"एक नये गाने की रिकार्डिंग की जाये...अपने मोबाइल्स और इण्टरनेट आदि पूर्व की भांति स्विच्ड औफ रखें....रात को पूर्व की भांति ही सबकुछ यहां छोड जायें, पर एक अन्तर होगा... वह यह है कि कक्ष में डिम लाइट में भी वीडियो रिकार्डिंग चल रही होगी....तब देखते हैं हमें क्या सफलता मिलती है...."
राज को यह परामर्श बहुत रुचिकर लगा....उसने समर की बहुत प्रशंसा की...अगले दिन एक नये गाने को साधारण संगीत दिया गया पर बताया गया कि मोष्ट हिट सौंग यह है.....रात को वाच्मैन भी असावधान ऊंघता रहा.....पर प्रातःकाल राज पहुंचा और उसने रिकार्डिंग रीप्ले की जिसमें चोर पकडा गया था...पर यह था कौन !....कोई उसे अभिजान न सका....इस घटना से दो बातें हुईं....एक तो चोर का अभिज्ञान न हो सका...द्वितीय, सुनील इस साधारण गाने को सुन सम्भवतः सावधान हो गया था...क्योंकि पुनः ऐसे ट्रिक अपनाये गये पर कोई नहीं आया....राज पुलिस इंस्पेक्टर से मिल सीक्रेट्ली इस वीडियो रिकार्डिंग की एक कौपी उसे सौंप देता है कि यदि वे लोग उस चोर को कभी आइडेण्टिफाइ कर पायें...
१७ एक दिन संयोग से समर और सभा दोनों राज म्यूजिक में एक स्थान पर मिल जाते हैं....सभा उसे देख आंखें फाड अप्रसन्नता से कुछ कहना ही चाहती है कि तभी राज वहां आ सभा को बताता है - "ये मिष्टर समर....मौडल टर्ण्ड ऐक्टर....आजकल मेरी बहुत सहायता कर रहे हैं....आइ रियलि एम वेरी ग्रेट्फुल टू हिम...."
राज समर संग बातें कर रहा है...."समर, तुम्हारे बताये ट्रिक्स से मैं आजकल आराम की नीन्द सो पा रहा हूं....मोबाइल आदि औफ...कुछ भी रिकार्डिंग यहां न रख संग अपने आवास लेता जाता हू...वहां भी रात-दिन वीडियो रिकार्डिंग सीसीटीवी से चलती रहती है....मैं तुम्हें क्या प्रतिदान में दूं...?"
"आप दे सकते हैं कुछ मुझे...ऐसी ही सहायता...."
"सहायता!!! किस काम में...?"
"मैं सभा से विवाह करना चाहता हूं...."
सुनते ही प्रथम तो राज के मन में कुछ क्रोध-सा उभरा...पर तत्पश्चात् समर को ध्यान से परखते समझते बोला - "पर वो तुमसे क्यों विवाह करेगी!! निःसन्देह वह स्वयम् से अधिक प्रगत पति का चयन करेगी....."
"मैं भी तो प्रगति कर रहा ही हूं...कुछ नहीं से मौडल....मौडल से फिल्म अभिनेता....और अब आप यदि मेरी सहायता करें तो मैं हीरो भी बन जा सकता हूं....."
"हां....हीरो बन जाओ यदि तो तुम दोनों का पेयर अच्छा लग सकता है....पर तुम तो हीरो हो नहीं...."
"इसीलिये तो कह रहा हूं आप सहायता करें मेरी हीरो बनने में..."
"अभी ये रोल तो दिखाओ....कैसा कर रहे हो...."
१८ समर मन लगाकर अच्छा से अच्छा अभिनय करने का प्रयास कर रहा है....वह अब अधिक स्मार्ट भी लगने लग गया है....सभा उससे कम्पनी में कभी-कभी बात कर लेती है....समर उसके प्रेम में गीत गा रहा है....उसने निज टेबल पर एक फोटो अल्बम रखा है जिसमें मध्य में एक बडा गोल छेद है...उस रिक्त गोले से कुछ आगे बढकर उस गोले के आकार का ही फोटो किनारे से लगा है...वहां सभा का फोटो लगा है....गाते-गाते आंखें मूंदे वह सभा के चित्र को चूमता है....पर तभी एक छोटी बिल्ली वहां आ उस गोले में सर डाल देती है जिससे वह चित्र तो बिल्ली के सर के ऊपर चला जाता है और समर उस बिल्ली के ओष्ठों को चूमता है...-"आः...ऐसा लगता है सच में सभा को चूम लिया...गीला मांसल ओष्ठ...." वह आंखें खोलता है तो समक्ष बिल्ली का सर...बिल्ली की ’म्याऊं...’ समर उछल भागता है....
१९ समर के उस फिल्म में अभिनय को देख सभा भी उसकी अच्छी प्रशंसा करती है -"प्रशंसनीय अभिनय किया है तुमने....पर इस छोटे-से रोल से तुम्हारा हीरो की ऊंचाई को पा पाना बहुत दूर की यात्रा जान पडती है......हाउएवर...मेरे संग फ्रेण्ड्ली रिलेशन के योग्य तो तुम बन गये हो.... आओ, तुम्हें मैं अपने कार में तुम्हारे आवास ड्रौप कर दूं...." समर अभी भी अपनी कार न ले औटो/टैक्सी और लोकल ट्रेन-यद्यपि फर्ष्ट क्लास में ही यात्रा करता है.... सम्भवतः अभी भी स्वयम् को बहुत नीचे ही अनुभव कर रहा है....मार्ग में जाते समय एक बिल्डिंग से एक व्यक्ति निकल बाहर आता दिखता है जिसे देख समर चौंकता है.....-"सभा जी....ये वही व्यक्ति नहीं है जो हमारी उस दिन की वीडियो रिकार्डिंग में है...?" सभा उसे ध्यान से देख नहीं पाती है और वह व्यक्ति कार में घुस चला जाता है....समर सोचता ही रह जाता है और वह उस कार का नम्बर नोट करना भी भूल गया...." आप अभी जाइये...मैं कुछ देखता हूं यदि यहां से कोई जानकारी मिल पाये...." वह उतर उस बिल्डिंग में जाता है.....नामप