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"हूं...ठीक अभिजाना आपने...."
समर ने हाथ मिलाने के उद्देश्य से हाथ बढाते हुए कहा -"मैं समर....एक उभरता हुआ मौडल हूं....अभी रूपा च्यवनप्राश और गोल्डन अण्डरवियर के लिये माड्लिंग की है जो टीवी पर और सिनेमाहाल में भी आ रहे हैं...." सभा हाथ मिलाये विना मुस्कुराती हुई सिर हिलाती है....राज सबको चलने को कहता है....सभी उद्यत हो जाते हैं...राज समर से हाथ मिला बाई कहता है, और वे सभी वहां से चले जाते हैं....समर उन्हें जाता देख रहा है -’अभी मौडल हूं इसलिये तुमलोगों को वैल्यूएबल नहीं जान पडा....अब मैं तुमलोगों से हीरो बन ही मिलुंगा....’
१२ पिक्निक से लौट सभी अपने-अपने आवास चले जाते हैं पर राज पुनः औफिस लौटता है नये गीतों का पुनर्मूल्यांकन करने....वाचमैन गेट खोलता है.....राज अन्तः प्रवेश कर हौल में प्रवेश करता है कि उसका मोबाइल फोन बजता है....राज -"हलो..."
"मिष्टर राज....बहुत मनोरंजन कर लिया....अब तुम्हारे हंसने नहीं रोने का समय है...."
"कौन बोल रहा है????"
"तुम्हें मिथ्या आनन्द से बचानेवाला...व्यर्थ में समय नष्ट करोगे, उससे भी बचानेवाला....समय रहते तुम्हें वास्तविकता का बोध करानेवाला...."अजित-सम स्वर में बोला...
"व्हाट डू यू मीन.....कहां से बोल रहे हो....ये फोन नम्बर???"
"पीसीओ से बोल रहा हूं.....बूथ वाला भी मेरा मुखडा नहीं देख रहा है....न ही देख पायेगा...."
"कहना क्या चाहते हो...?"
"इन दोनों गीतों के संगीत भी अब तुम्हारे नहीं रहे...."
राज को तीव्र दुःख की अनुभूति हुई, पर तुरत सम्भलकर बोला- "कितने रुपये चाहते हो?...."
"कितना भी नहीं....क्योंकि उन गीतों के संगीत तो मैंने प्रिया म्यूजिक को बेच दिये हैं....वे किन्हीं और गीतों पर वे संगीत सेट कर रिलीज कर देंगे.....हूउउउउउउउउउउउउउउ..."
’ओ....इसका अर्थ हुआ कि मेरा दुश्मन प्रिया म्यूजिक वालों से कोई इतर है...’ "पर...ये तुम्हारे हाथ लगे कैसे????"
"चमत्कार है....वो मैं तुम्हें क्यों बताउं?????"
राज सोचता है कि यदि एक बार भी इस व्यक्ति को इसके नाम के संग बात कर लूं तो इसका स्वर पकड में आ जायेगा...तभी कौल डिस्कनेक्ट हो गया....उसने वाचमैन से पूछा कोई आया था क्या....वाचमैन ने बताया कोई-कोई आया तो था पर बाहर से ही पूछकर चला गया....राज समझ गया कि वाचमैन की दृष्टि से बचकर किसी ने द्वार अन्लौक किया होगा...ओह्...ये ताले उन्नीसवीं शताब्दी के~!!!!!!!
थके मन से राज आवास लौटता है और पत्नी आदि को उसे न जगाने को कह नीन्द की गोली खा सो जाता है.....सभा आदि सारी टीम यह बात जान ऐसा अनुभव करती है मानो मिठाइयों का डब्बा खा अब किसी ने कडवे मिर्च मुंह में डाल दिये हों....
१३ समर के भाग्य ने उसका कुछ और अच्छा संग दिया.....उसे एक फिल्म में एक साधारण पात्र के रूप में ही पर कोई पन्द्रह-बीस मिनट पर्यन्त कहानी में अभिनय का रोल मिल गया था...उसकी प्रसन्नता की सीमा नहीं थी....उसने विचार किया- ’अन्दाज में अक्षय कुमार विवाह करने का प्लान बनाते ही रह जाता है और उधर जिससे वह विवाह करना चाहता है उसका किसी और से विवाह हो जाता है....पर मैं विलम्ब न कर शीघ्र उसके समक्ष अपना प्रेम अभिव्यक्त कर दूं.....कल मैं सभा से बात करता हूं....वैसे, कल क्यों आज ही....आज कब.....अभी..और कब....शुभम् सुशीघ्रम्....’ वह सभा से मिलने उसके आवास पहुंचता है...वहां स्वयम् को सभा से पूर्व-परिचित बताता है और किसी विशेष कार्यवश मिलने की बात कहता है....समर!!! इस नाम का कौन व्यक्ति मेरा बहुत परिचित है!!! ऐसा चिन्तन करती वह अपार्ट्मेण्ट के गेष्ट रूम में आती है....
"हलो...आपने मुझे अभिजाना....मैं समर...आपलोग जब द्वीप पर पिक्निक मनाने आयी थीं तब मेरे बोट से आपलोगों पर छींटें पड गयी थीं...."
"हां....मौडल....."
"तब मैं केवल मौडल था...अब मैं फिल्मों में भी आ गया हूं....ये देखिये कौण्ट्रैक्ट पेपर....आज ही मुझे इतना अच्छा रोल मिला है..."
"हूं...अच्छी बात है...पर....मुझसे सम्पर्क का कारण?"
"आपने अन्दाज फिल्म देखी है ? अक्षय कुमार की.....?"
"देखी होगी...अभी ध्यान नहीं है मुझे इस बात का...."
"उसमें अक्षय कुमार विवाह करने का प्लान बनाते ही रह जाता है और उधर जिससे वह विवाह करना चाहता है उसका किसी और से विवाह हो जाता है....पर मैं विलम्ब न कर शीघ्र अपना प्रेम अभिव्यक्त कर देना चाहता हूं...."
"किससे अभिव्यक्त कर देना चाहते हैं? और उसमें मुझसे क्या सहायता आपको चाहिये...?"
"मैं आपसे ही विवाह करना चाहता हूं....द ग्रेटेष्ट फैन औफ यू....”
"मुझसे?????" उसे कुछ क्रोध आ गया - ’आज न जाने किसका मुंह देख उठी थी....’ "आप हैं कौन? और क्या बायो-डेटा है आपका?..."
समर फटाफट अपना बायो-डेटा निकाल देता है....सभा ध्यान से पढती है...."इतना अच्छा बायो-डेटा है....कहीं सर्विस के लिये क्यों नहीं प्रयास किया....?"
"कहां आजकल गुणवान्विद्वान् लोगों सर्विस मिलती है....सर्विस तो अब जन्म के आधार पर मिलने लग गयी है....इस जाति या सम्प्रदाय में जन्म लिया है तो उसे सर्विस मिल जाती है..इन लोगों को सर्टिफिकेट्स और मार्क्शीट्स भी मनचाहा मिल जाते हैं....और सच में जो विद्वान् है उसे लात मार दिया जाता है - क्लेम करो तो ढूंढ-ढूंढ कर उनमें त्रुटियां दिखायी जायेंगी...."
"मेबी...बट तुमने ऐसी कौन-सी सफलता पा ली कि तुम अपने को मुझसे विवाह के योग्य समझने लग गये....जानते हो...मेरा केयरियर कितना संवरा हुआ है...और मुझे गाने के लिये गीतों की लाइन लगी है....कई फिल्मों से औफर आ रहे हैं - मेरा गायन राज के संगीत के संग......डू यू अण्डर्ष्टैण्ड द रियलिटी...ऐण्ड द डिफ्रेन्स बिट्वीन यू ऐण्ड मी...?"
"हां...पर आप मेरा केयरियर भी तो देखिये...कितना ग्रो कर रहा है...तीव्र गति से.....आपको स्मरण होगा एक बार आपके किसी और्डिनरी फैन ने आपको फोन किया था, तो आपने उसे विना किसी वैल्युएवल पोजीशन में आये बौलिवुड सेलिब्रेटीज को फोन करने से मना किया था.....?"
सभा कुछ स्मरण करने का प्रयास करती कहती है - ”अं...हं...."
"वो फैन मैं ही था....तब मैं कुछ नहीं था....उसके पश्चात् मैं मौडल बना...आपकी कृपा से...और अब फिल्मों में भी आ गया....एक दिन हीरो भी बन जाउंगा...."
"तो तभी तुम मुझे प्रोपोज करने की सोचना....वैसे तुम्हारे लुक्स अच्छे हैं, पर मेरी कामना है कि मेरा पति मुझसे हायर ष्टेटस का हो....."
"हायर ष्टेटस की परिभाषा मैं क्या समझुं?"
"रिचनेस हो...तुम्हारे संग ऐट लीष्ट एक-दो करोड रुपये तो हों ही....तभी तुम्हारा संग करना अपने ष्टैण्डर्ड के अनुकूल जान पडेगा...."
"मैं न्यूनतम इतना धनवान् बनने का प्रयास करता हूं....पर कहीं ऐसा न हो कि आप इस अवधि में किसी और से विवाह कर लें...."
"अभी इस वर्ष तो विवाह नहीं कर रही...अगले वर्ष की बात अगले वर्ष देखी जायेगी.....अभी इस वर्ष भी सात-आठ मास शेष हैं....और तुम....विना इतना रिच बने मुझसे फोन पर भी बात न करना, मिलने की तो बात भूल जाओ...." सभा वहां से चली जाती है.....समर गम्भीरता से उसे जाता देख रहा है.....
१४ समर ने धनवान् बनने का संकल्प लिया, क्योंकि सभा उसके मन और हृदय में समाती चली जा रही थी....उसने जौन का दुःसाहस अपने बल पर करने का विचार किया....उस ज्वेलरी काम्प्लेक्स में सिक्युरिटी बहुत टाइट हो चुकी होगी..या प्रत्येक व्यक्ति सन्देह की दृष्टि से देखे जा रहे होंगे, ऐसी आशंका कर उसने कहीं और कुछ कर डालने को सोचा...रात के आठ बए वह आवश्यक उपकरणों के संग वह बाहर निकला....वह सडक पर आते-जाते ऊंचे-ऊंचे भवनों को देख रहा है...चलते रोड पर के किसी शौप में घुसपैठ करना अच्छा रहेगा....ऐसा सोच वह मुख्य मार्ग के एक बडे ज्वेलरी शौप को लक्ष्य बनाता है.....शौप का शटर गिर चुका है और गार्ड वहीं मंडरा रहा है....वह सावधानी से शटर के ऊपर के जल रहे लाइट को लक्ष्य बनाता है....लाइट चटाक से फूट जाती है....इसके पूर्व कि गार्ड कुछ निश्चय कर पाये, समर उसे पीछे से अनेस्थेटिक सूंघा देता है...शरीर को खींच साथ लगे छोटे दीवार के पीछे छुपा देता है....तत्पश्चात् सावधानी से शनैःशनैः चाभी बनाना आरम्भ करता है....उसके पेन्सिल टार्च की किरण यद्यपि उसके शरीर से छिपी है तथापि समक्ष