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"आपको जिस काम के लिये लाखों रुपये मिल रहे हैं उस काम को सुनील आपसे फ्री में नहीं करा सकता है....उस डौक्युमेण्ट को आप फाड डालिये....विशेषकर ऐसी स्थिति में जबकि आपने अभी काम वहां आरम्भ भी नहीं किया है...."
"पर वे यदि कोर्ट गये तो????’
"कोर्ट भी सुनील को आपका शोषण करने की अनुमति नहीं देगा....न ही उसे आपकी गायन क्षेत्र में होनेवाली प्रगति में उसे बाधा डालने की अनुमति देगा....हम लडेंगे आपकी ओर से केस....आप उसकी चिन्ता न करें..."
"तो ठीक है...मैं कब आपसे मिलुं?"
"अभी रिकार्डिंग करनी है...मैं कार भेज रहा हूं आपके ऐड्रेस पर.....आ जाइये..."
"पर इतनी रात मैं बाहर कहीं कैसे जा सकती हूं???"
"ठीक है....आप प्रातः आठ बजे कम्पनी में स्वयम् आ जाइये....वैसे मैं आपको रिमाइण्ड करा दूंगा...."
"ओके....गुड नाइट...."
"गुड नाइट"
अगले दिन समय से सभा वहां पहुंच जाती है...राज उसे रिकार्डिंग रूम में ले जाता है.....उसकी व्वाइस-टेष्टिंग आदि कई प्रक्रियाओं से गुजरना पडता है.....अन्ततः गाने के लिये सर्वथा उपयुक्त मान उसका गायन रिकार्ड होता है...सप्ताह पश्चात् वह फिल्म रिलीज होती है जिसके सभा द्वारा गाये दोनों गीत हिट सिद्ध होते हैं.....उसे बहुत प्रशंसा मिलती है....इसी मध्य सुनील का फोन आता है -"सभा जी, आपने हमारे संग कौण्ट्रैक्ट साइन किया था?????"
"पर सुनील जी....यहां मुझे डायरेक्ट फिल्म में एण्ट्री मिल गयी है....और रुपये कितने मिले आप जान गये होंगे!!! फिल्म रिलीज होने से सप्ताह भर पूर्व ही दो गाने इन्सर्ट करने थे जिन्हें मैंने गाया...आपको तो प्रसन्न होना चाहिये कि यदि मैं आपके संग रहती तो कहीं अन्धेरे में भटकती रहती...."
"व्हाट??" मन में ’यदि इसके सर पर राज का हाथ नहीं होता तो मैं इसे बताता ऐग्रिमेण्ट तोडने का अर्थ क्या होता है...’
जान पडता है सभा उसके मन की बात जान गयी...बोली -"वैसे, कोर्ट भी....लिखित ऐग्रिमेण्ट होने पर भी किसी के शोषण की अनुमति नहीं देता है...और न ही किसी की प्रगति में बाधा डालनेवाले ऐग्रिमेण्ट को स्वीकार्य मानता है....."
सुनील फोन रख देता है। पर उसका हृदय जला हुआ है....उसने एक अन्य नयी गायिका को ले एक एल्बम रिलीज किया...पर कठिनाइ से वह मात्र लगायी पूंजी जितना ही धन अर्जित कर पाया उससे....जैसे-जैसे वह राज म्यूजिक की उन्नति होता देखता, वैसे-वैसे उसके हृदय में पीडा बढती जाती -"यदि सभा मेरे संग होती तो आज सुनील म्यूजिक इस ऊंचाइ को पा रहा होता....उसने कुछ प्लान बनाया....
१० सभा बौलिवुड के प्रसिद्ध गीतकार और कथा-लेखक राघवेन्द्र कश्यप से प्रेरणा ले स्वयम् गीत लिखने का अभ्यास करती है....एक अच्छा-सा गीत लिख उसे राघवेन्द्र को दिखाती है....राघवेन्द्र उसकी प्रशंसा करते हैं....राज को भी यह गीत प्रिय जान पडता है....वह उसे संगीत देता है....तब सभा उसे बहुत ही मधुर गाती है.....राज ऐसे-ऐसे आठ-दस गीतों का संग्रह कर एक एल्बम बनाने की बात कहता है....तभी एक फोन आता है - ”मैं प्रिया म्यूजिक से बोल रहा हूं....अभी-अभी हमें ज्ञात हुआ है कि एक गीत ’आंखों में आधी रात है...’ जो हमने चार-पांच दिन पूर्व ही रजिष्टर्ड करा लिया था, तथा कल उसे संगीत में ढाल हमारी गायिका प्रिया ने उसे स्वर भी दिया....उसे उसी संगीत के संग आपने आज अपनी गायिका सभा से गवाया है?????"
"क्या बोल रहे!!! वह सभा जी की मौलिक रचना है....और उसकी धुन भी मैंने कल पूर्ण की है....!!!"
"वह तो कल शाम ही हमने टीवी पर प्रस्तुत करने भेज दिया है जिसका प्रूफ भी हमारे संग है...."
"क्या प्रूफ है तुम्हारे संग??? अपने गाने की रिकार्डिंग आदि हमें ईमेल करो...."
"पांच मिनट प्रतीक्षा करो...”
ईमेल आता है जिसकी फाइल में किसी और के स्वर में यही गाना इसी धुन के संग गाया हुआ मिलता है... राज आश्चर्यचकित रह जाता है....सभा भी मूक देखती रह जाती है.... चोरी हुई...पर कैसे हुई!!! किसने विश्वासघात किया!!!
दोनों पुनः साहस करते हैं...सभा नया गीत लिखने बैठती है....राज को एक नयी फिल्म में संगीत देने का औफर मिला है....सभा ने बहुत लगन से इस फिल्म के लिये दो गीत लिख अपनी गीतों का भावार्थ राज को समझा दिया है...राज तीन-चार दिन लगा बहुत परिश्रम से अभी द्वितीय गाने को भी संगीत में ढाल आराम कर रहा है....विचारता है कि अभी दो-तीन दिन पश्चात् अन्य तीन गानों को भी मधुर संगीत दे देगा....रिकार्डिंग रूम बन्द है...कोई इन्ष्ट्रूमेण्टलिष्ट भी आज नहीं आयेगा....पर अपनी गायिका सभा तो आ ही सकती है.....राज ने टीवी औन किया....न्यू रिलीज में नये गाने आ रहे थे....अच्छा संगीत है....पर यह क्या!! अभी चार दिन पूर्व जिस गाने को उसने सुरों में ढाल संगीत से सजाया था वह इस शुक्रवार को रिलीज होनेवाली एक नयी फिल्म के गाने के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था.... कितना धन व्यय हुआ था इस गाने के निर्माण में, और इसे कोई फ्री में ही उडा ले गया....द्वितीय गीत जो उसने संगीतबद्ध किया है वह भी निश्चय ही हाथ से जा चुका होगा!!! कुछ समय वह हताश लेटा रहा....तत्पश्चात् सभा व अन्य इन्ष्ट्रूमेण्टलिष्टों को यह बताता है -"ऐसा कैसे हुआ?????" सभी की बोलती बन्द थी....सभा आदि सभी वहां पहुंचते हैं....राज उन सबको टीवी की वह रिकार्डिंग दिखाता है.....सब चकित हैं....कार्यक्रम आगे बढता है....आनेवाले ऐल्बमों के गीतों की आरम्भिक पंक्तियां दिखायी जा रही हैं...."अरे...ये क्या!!! ये तो वो गाना है जिसे मैंने अभी परसों लिखा है और इसे मैं अभी राघवेन्द्र सर को दिखाने को विचार कर रही थी...!!!" सभा चिल्लायी...
१० सभा राघवेन्द्र से बात करती है....सारी बात बताती है...."सर...मुझे तो लगता है कोई एक ही दुश्मन राज और मुझे दोनों को हानि पहुंचाने पर उतारु है...."
"सुरक्षा के कुछ उपाय बता रहा हूं....लम्बे समय पर्यन्त मुझे ऐसी समस्यायों से संघर्ष करना पडा है....तुम मिलो तो मैं तुम्हें विस्तार से बताता हूं...”
सभा उनसे मिलने जाती है....राघवेन्द्र -"ये मोबाइल फोन और इण्टरनेट कनेक्शन दो ऐसे माध्यम हैं जिनसे होकर ये सारी जानकारियां लीक हो अन्यों के हाथ में पहुंच जाती हैं....यदि अपने मध्य ही कोई विश्वासघाती न हो तो....”
"फोन और इण्टरनेट!! कैसे???"
"फोन चाहे मोबाइल हो या लैण्ड्लाइन...दोनों ही से सीनियर एग्जिक्यूटिव्स आदि फोन के चारों ओर एक निश्चित दूरी पर्यन्त सीमा में हो रही सारी वार्ताओं व ध्वनियों को सुनते व रिकार्ड करते भी रह सकते हैं....मेरी जानकारी में तीन-चार मोबाइल कम्पनियों में ये सीनियर एग्जिक्यूटिव्स इतने दुष्ट प्रतीत हुए हैं कि जब चाहो तुम्हारे मोबाइल के टाक बैलेन्स से कितना भी रुपया काट लें... तत्पश्चात् कोई सुनने वाला नहीं...और तो और जानने में ऐसा आया है कि ये जिसे चाहे उस फीमेल एगजिक्यूट्व्स का फियरलेस्ली रेप करते हैं, और वहां भी कोई सुननेवाला नहीं....!!!! एक बार एक अभिनेत्री वेब्साइट्स सर्फ करते-करते पौर्न वेब्साइट्स पर चली गयी.... इण्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर ने यह देखा और उस अभिनेत्री के सौतेले अभिनेता भाई को सूचित कर दिया....भाई ने पिताश्री को सूचित किया प्रेरणा देते हुए....पिताश्री ने पुत्री को.... तत्पश्चात् सौतेले भाइयों ने भी.... ऐसा है कि जब पौर्न वेब्साइट्स तुम देख रहे हो तो समझ लो कि तुम्हारा माइण्ड इतना करप्ट हो चुका है कि तुम अब पुत्री, पुत्र, भाई, स्वसा, मां, पिता किसी के भी संग विना हिचकिचाहट के सम्भोग कर सकते....करते ही जाते...तृप्ति नहीं मिलती ऐसी प्यास जग जाती है....इससे आत्मा का - मानव का सर्वनाश बहुत निकट आता चला जाता है.... पौर्न वेब्साइट्स का ऐसा विनाशकारी प्रभाव है... सोचो...इन मोबाइल और इण्टरनेट सर्विस के एग्जिक्यूटिव्स और औफिसर्स को किसी भी उपभोक्ता के निजी जीवन में अवैध प्रवेश की छूट नागरिक और समाज दोनों के लिये कितनी हानिकारक है!!!! इसलिये अपने लिखे गीत आदि को फोन या इण्टरनेट के औन रहते न तो गुनगुनाओ, न किसी को सुनाओ, और न ही कम्प्यूटर में या फोन मेमोरी में कहीं रखो...क्योंकि वहां से भी शेयर्ड नेट्वर्क से चोरी से कौपी कर लिये जाते हैं....”
"पर...इतने...लाखों कष्टमरों को कुछ कर्मचारी कैसे इन माध्यमों से देखते-सुनते रह सकते हैं????"
"राइट...सबको नहीं...पर जिनके पीछे पडने का उन्हें निर्देश मिला हो...या जिस किसी की निजी बातों को सुनने-जानने का उनका मन बन जाये..."
"समझी...ऐसे ही हमारा सारा गीत-संगीत अन्यों के हाथों में पहुंचा है.....!!!! तो क्या अब सावधानी से अपने फोन्स और कम्प्यूटर्स को बन्द रखने पर सब सुरक्षित रहेगा???"
"वहां उपस्थित सभी के फोन्स औफ होने चाहिये...साथ ही यह भी चेक करवा लो कि कहीं कोई माइक्रोफोन तो नहीं लगा है..... एक बात और...नयी रचना या म्यूजिक कम्पोजिशन को सर्वप्रथम रजिष्टर्ड या कौपिराइटेड आदि किसी विश्वसनीय रूप में सुरक्षित करवा लो, तत्पश्चात् ही कहीं उसे ईमेल करो या भिजवाओ...."
"आह....अब सुरक्षा की आशा जगी है....इतनी लाभदायक जानकारी के लिये मैं किस प्रकार से आपको धन्यवाद दूं....."
"सभी किसी-किसी से लाभ पाते ही रहते हैं...."
११ राज राघवेन्द्र से हुई बात सभा से जान बहुत प्रसन्न होता है...उसे भी लगता है कि अब वह सुरक्षित है...वह स्वयम् भी राघवेन्द्र से बातकर उनको धन्यवाद देता है....सभी फोन्स और इण्टर्नेट आदि बन्द रखते हुए सुरक्षित रूप से उन दोनों गानों को पुनः संगीत में ढाल सारी टीम बहुत प्रसन्न है कि इसके लीक होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता.....राज आज अपनी जीत सेलिब्रेट करने सारी टीम के संग निकटवर्ती द्वीप पर जाता है.....पिकनिक मनाते हैं, गाना गाते हैं...शाम होने को है और अब सभी लौटने को उद्यत हैं.....तभी एक व्यक्ति बोट तीव्र गति से चलाता आता है जिससे छींटें पडती हैं सभी और राज दोनों को....वह कोई और नहीं, समर है...समर उनके समीप आता है और इन छींटों के लिये सौरी कहता है... राज - "इट्स औल राइट"
"और आपसे भी मैं क्षमाप्रार्थी हूं....यदि मैं भूल नहीं कर रहा तो आप प्रसिद्ध गायिका सभा हैं!!!"